tag:blogger.com,1999:blog-13426959.post114543259382658503..comments2008-05-17T12:09:00.248+02:00Comments on मुक्त जनपद: नर्मदा घाटी के किसानों का बाजार (अ)भावमनोजhttp://www.blogger.com/profile/00331551278069246905noreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-13426959.post-1148433083416625852006-05-24T03:11:00.000+02:002006-05-24T03:11:00.000+02:00मनोज के विचार से सहमति जताते हुये अनुरोध करूंगा कि...मनोज के विचार से सहमति जताते हुये अनुरोध करूंगा कि वीरेंद्र जैन का उपन्यास 'डूब'पढ़ें। विस्थापितों का दर्द शायद समझ में आये। जिस महिला में वंचितों के लिये अपनी जिंदगीका बड़ा हिस्सा लगा दिया ,उसके कामों के पीछे राजनीति ,जांच की बात कहने के पहले सोचना चाहिये।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13426959.post-1145870981654328062006-04-24T11:29:00.000+02:002006-04-24T11:29:00.000+02:00खूबसूरत ब्लॉग सटीक विचारपंकज के विचार में कई मसलो...खूबसूरत ब्लॉग सटीक विचारपंकज के विचार में कई मसलों की अनदेखी साफ नजर आती है। प्यास की इस ढाल के खेल को समझना बेहद जरूरी है।masijeevihttp://www.blogger.com/profile/07021246043298418662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13426959.post-1145484053321582072006-04-20T00:00:00.000+02:002006-04-20T00:00:00.000+02:00आपने अपने आलेख में जिस पर्यटन स्थल का जिक्र किया ...आपने अपने आलेख में जिस पर्यटन स्थल का जिक्र किया है वैसे पर्यटन स्थलों को विकसित करना नर्मदा विकास योजना के मुख्य लक्ष्यों में शामिल है।इसके अतिरिक्त इन्डस्ट्री और बड़े गन्ना किसानों को सस्ते दर पर पानी पहुँचाना प्राथमिकता की सूची में ऊपर है। कच्छ के निवासियों के प्यास का मुद्दा तो बाद मे परियोजना को नैतिक वैधता देने के लिए बाद में जोर दिया गया है। कच्छ निवासियों की प्यास तो तब मनोजhttp://www.blogger.com/profile/00331551278069246905noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13426959.post-1145442772665190922006-04-19T12:32:00.000+02:002006-04-19T12:32:00.000+02:00नर्मदा बांध के बीच में बाज़ारवादी ताकतें कहाँ से आ ...नर्मदा बांध के बीच में बाज़ारवादी ताकतें कहाँ से आ गई? ये कोई कोर्पोरेट सौदा नहीं है, यह विशुद्ध रूप से लोगों के जीवन मरण से जुडा मसला है. विस्थापित लोगों को उनका हक तो मिलना ही चाहिए, पर गुजरात के लोग भी प्यासे नहीं मारे जा सकते? मेधाजी जो खेल खेल रही हैं उसकी भी जाँच होत्नी चाहिएPankaj Benganihttp://www.blogger.com/profile/05608176901081263248noreply@blogger.com